अतिरिक्त योग्यता का पर्याय बने संस्कृत

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    यदि हम संस्कृत को जीवित रखना चाहते हैं तो उसका प्रयोग भाषा की तरह नहीं, बल्कि उपकरण के रूप में करना होगा

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    Courtesy : Jagran – Apni Baat

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