दुख और सुख

दुख और सुख

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संसार का मायाजाल मकड़ी के जाल की भांति है। जो जीव उसमें एक बार फंस जाता है, वह निकल नहीं पाता।

Source : दुख और सुख
Courtesy : Dainik Jagran

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