विरोधाभासों से भरा भारतीय समाज, गजब तरीके से हालात से सामंजस्य करने...

विरोधाभासों से भरा भारतीय समाज, गजब तरीके से हालात से सामंजस्य करने की क्षमता

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हम जैसे-जैसे आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं, प्रत्यक्ष हिंसा के साथ अदृश्य एवं अप्रकट हिंसा के रूप बढ़ते जा रहे हैं

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Courtesy : Jagran – Apni Baat

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