संपादकीयः रिहाई की राह

संपादकीयः रिहाई की राह

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तकरीबन बारह साल पहले दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के आरोपियों का अदालत से बरी होना यही साबित करता है कि पुलिस की कार्यप्रणाली के चलते कितने स्तरों पर लोगों को निराशा और यातना भुगतनी पड़ती है।

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Source : संपादकीयः रिहाई की राह
Courtesy : Jansatta

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