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Analysis: लोकतंत्र में चुनाव उत्सव की तरह, इसका यह मतलब नहीं कि ऐसे उत्सव दो-चार माह में होते रहें

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चुनाव नतीजों के बाद भी कर्नाटक किसी नतीजे पर पहुंचता नहीं दिखा। फिलहाल किसी के लिए भी यह कठिन है कि कर्नाटक में राजनीतिक अस्थिरता का ऊंट किस करवट बैठेगा।

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Courtesy : Jagran – Apni Baat

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