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Religion: प्रशंसा निस्वार्थ होती है जबकि चापलूसी में स्वार्थ का भाव रहता है

संसार में जितने भी महान व्यक्तित्व हुए हैं, अपार कष्ट सहने के बाद ही समाज में प्रतिष्ठित हुए हैं। Read More : Religion: प्रशंसा निस्वार्थ होती है जबकि चापलूसी में स्वार्थ का भाव रहता है Courtesy : Jagran - Apni Baat
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