Opinion: आशंकाओं से मुंह मोड़ लेने से आसन्न विपत्तियां टल जाती हैं

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उपयुक्त समय पर धारण की गई उचित खामोशी अंतत: आपातकाल की त्रासदी को भी अनुशासन पर्व में तब्दील करती देखी सुनी गई है।

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Courtesy : Jagran – Apni Baat

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